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FISH FARMING BUSINESS IN HINDI (मछली पालन का व्यवसाय कैसे शुरू करें?)


 




How to Start Fish Farming Business In India?

दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं कि मछली पालन का व्यवसाय किस प्रकार से शुरू किया जाए तो आप इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़िएगा आपको इस पोस्ट में मैं सारी बातें क्लियर कर दूंगा और आपको बताऊंगा कि कैसे आप को मछली पालन का व्यवसाय शुरू करना है दोस्तों अगर आप मछली पालना चाहते हो तो सबसे पहले आपको जरूरत होगी एक तालाब की | अगर आपके पास तालाब है तो ठीक है अगर नहीं है तो सबसे पहले आपको  तालाब का निर्माण करवाना पड़ेगा | दोस्तों मछली पालन करने के लिए आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए आपको बता दें कि अगर आप मछली पालन का व्यवसाय वैज्ञानिक तरीके से करते हैं तो इसमें आपको अधिक उत्पादन मिलता है और कम पूंजी में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है | 

आज पुरे भारत में मछलियों  की काफी अच्छी डिमांड है और प्रतिदिन इसकी मांग बढ़ती ही जा रही है अगर कोई भी व्यक्ति इस बिजनेस को करता है तो उसे हानि कम और लाभ ज्यादा होने के Chance रहते हैं लेकिन अगर आप इस बिजनेस को करते वक्त सावधानी नहीं बरत रहे हैं तो आपका इसमें नुकसान भी हो सकता है तो दोस्तों मैं आपको बताने जा रहा हूं कि आपको कौन-कौन से उपाय करने हैं और किस प्रकार से आपको मछली पालन का व्यवसाय शुरू करना है तो आपको इसमें लाभ अधिक होगा |



मत्स्य पालन हेतु तालाब या स्थान का निर्माण :- 


दोस्तों तालाब या टैंक का निर्माण आप कई तरीकों से कर सकते हैं जैसे अगर आप मेहनत और समय बचाना चाहते हैं तो आप प्लास्टिक के बड़े-बड़े टैंक खरीद सकते हैं और आप उनमें मछलियों का पालन कर सकते हैं इसके अलावा आप जमीन पर इसका निर्माण करवाना चाहते हैं तो आपको तालाब का निर्माण करवाना होगा और इसके लिए आपको मशीन की आवश्यकता पड़ेगी अगर आपका बजट कम है तो आप फावड़े की मदद से भी तालाब का निर्माण आसानी से करवा सकते हैं निर्माण करने के बाद ब्लीचिंग पाउडर और मिट्टी में चूने का छिड़काव जरूर कर दें ऐसा करने से चयनित क्षेत्र में मछलियों को हानि पहुंचाने वाले कीट एवं अनावश्यक जीव मर जाते हैं जिससे आपके मछलियों को नुकसान नहीं होने का शंका खत्म हो जाता है



संचयन से पहले तालाब का प्रबंध:- 


दोस्तों मछली के बीज का संचयन करने से पहले तालाब का प्रबंधन होता है इसका मतलब तालाब की तैयारी के लिए आपको पहले तालाब में जो खरपतवार या कीड़े मकोड़े हैं उनको निकालना होता है इसे निकालने के लिए आप लेबर की हेल्प ले सकते हैं या तालाब में जाल बिछा कर भी इन्हें निकाल सकते हैं इसके बाद आपको  तालाब में जो मांसाहारी मछलियां हैं जो कि पाले जाने वाली मछलियों को खा जाती हैं उसका नियंत्रण करेंगे इसके लिए आप जाल की सहायता ले सकते हैं या 2500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से महुआ की खली का प्रयोग करके आप  उस पर  नियंत्रण कर सकते हैं 

इसके अलावा आप ब्लीचिंग पाउडर को 300 से 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन याद रहे जब आप ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग कर रहे हो तो उसमें क्लोरीन की मात्रा 30% होनी चाहिए और सूर्यास्त के बाद ही उसका उपयोग करना चाहिए इसके बाद हमें तालाब के कीड़े मकोड़े पर नियंत्रण करना होगा इसके लिए आप 300 किलोग्राम प्रति  हेक्टेयर की दर से तालाब में चुना डालें इससे सभी कीड़े मकोड़े मर जाते हैं और बाद में तालाब में जाल डाल करके उनको निकाल लेना चाहिए | 



क्या-क्या चाहिए मछली पालन का बिजनेस करने के लिए:- 



दोस्तों मत्स्य पालन की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आवश्यकता होती है पूंजी निवेश करने की यदि हम पूंजी निवेश की बात करें तो इसमें काफी हद तक सरकार भी मदद कर रही है आप भी जानते हैं मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नीली क्रांति का नाम लिया जाता है और सरकार की इस योजना के अनुसार यदि आप मत्स्य पालन के लिए 1 हेक्टेयर की जगह में तालाब बनवाते हैं तो ₹500000 केंद्र सरकार देगी और साथ ही 25% सहायता राज्य सरकार करेगी इसका मतलब यह है कि आपके 75% सब्सिडी सरकार के द्वारा प्राप्त हो जाएगी अर्थात 50% केंद्र सरकार व 25% राज्य सरकार आपकी सहायता कर देगी बाकी जो बचा हुआ 25% है उसका इंतजाम आपको स्वयं करना होगा  |

दोस्तों मत्स्य पालन के लिए सबसे पहले आपको एक तालाब या टंकी बनानी होगी जिसमें मछलियों को डाल करके और मछलियों का पालन किया जा सके | एक हेक्टेयर तालाब में कम से कम ₹40,000 तक का खर्च आता है इसके बाद आपको मछली के बीज की जरूरत पड़ती है जिसे आप 5 या ₹10 हजार का , जितनी भी मात्रा में आपको जरूरत हो खरीद सकते हैं इसके बाद में मछलियों को खिलाने के लिए उनके आहार की व्यवस्था करनी पड़ती है और मछलियों की देखभाल के लिए तालाब में जालिया लगवाने के लिए आपको जालियों का प्रबंध भी करना होता है | 



मछलियों की प्रजाति:-  


पाली जाने वाली मछलियों की प्रजाति में छह प्रजाति प्रमुख हैं -

  1. कतला 
  2. रेहू 
  3. म्रिगल 
  4. ग्रास कॉर्प 
  5. सिल्वर कार्प 
  6. कामन कार्प 

ये सभी मछली की 6 प्रजातियां पानी के अलग-अलग Layer में रहती हैं | नीचे में रहने वाली मछलियां हैं म्रिगल ,और कामन कार्प  का 40% ,ऊपर में रहने वाली मछली है कतला ,और सिल्वर कार्प का 40% ,और 20% बीच में रहने वाली मछली रेहू का संचय करना चाहिए ,10% ग्रास कार्प  का संचय पूरे तालाब में करना चाहिए | 

इस तरह से तालाब का जो तीनों  Productivity Layer  है वह पूरी तरह से Economically Balance हो जाता है और किसान भाइयों को ज्यादा से ज्यादा उत्पादन मिलता है |



 मछली का आकार और वजन :- 


दोस्तों तालाब में मछलियों का संचयन करते समय मछली के बीज का आकार कम से कम 30 से 40 सेंटीमीटर होना चाहिए और उनका वजन कम से कम 50 ग्राम होना चाहिए |  


बीज को डालने का सही समय :- 


अगर आप 2 क्रॉप  का प्लानिंग करते हैं तो उसके लिए बीज डालने का सही समय फरवरी - जून और जुलाई - नवंबर तक का होता है अगर प्लानिंग एक क्रॉप का है तो उसके लिए जून से अप्रैल तक का समय सही रहता है |

बीज संचय से पहले ध्यान रहे कि अगर आप बीज बाहर से ला रहे हैं तो उसका अंकुरण Proper होना चाहिए | अगर आप बाहर से बीज लाते हैं तो जितना पानी आप के बीज वाले पॉलिथीन बैग में है उसमें उतना ही पानी तालाब के भी मिलाएं अब 10 मिनट तक उसको अंकुरण करें और उसके बाद तालाब में बीज को उलट दें |



मछलियों के लिए आहार का प्रबंध :-  


दोस्तों वैज्ञानिक तरीके से मछली का पालन करने में ऊपरी आहार का बहुत ही अहम रोल है | आहार के रूप में आप चावल की भूसी ,सरसों की खली को बराबर मात्रा में मिलाकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर आप Market में मिलने वाले Feed का भी इस्तेमाल कर सकते हैं दोस्तों 1 महीने में अगर हम मछलियों को 5% के दर से खाना खिलाते हैं तो 25 किलोग्राम Per Day  हमारा Feed Requirement होता है , इसी तरह 2 महीने में अगर 4% के दर से खिलाएंगे तो 30 से 35 किलोग्राम Feed  की आवश्यकता पड़ती है | 3 महीने में 4% के दर से लगभग 55 किलोग्राम , 4 महीने में 90 किलोग्राम और 5 महीने में 3% की दर से खिलाते हैं तो 108 किलोग्राम  Per Day आहार की आवश्यकता होती है |


दोस्तों मत्स्य पालन के लिए कई ऐसे आहार और हैं जिन्हें आप स्वयं घर बैठे बना सकते हैं मछलियों  के आहार के लिए सबसे बेहतर होता है आप चावल का आटा तैयार करें उसके बाद चावल के आटे में कुछ मात्रा में पानी मिलाकर आप उसकी गोलियां बना लें कई लोग गेहूं के आटे की गोलियां भी मछलियों को देते हैं उसके बाद सरसों की भूसी आप घर पर ही तैयार कर सकते हैं और तालाब में डाल सकते हैं |



बीज संचय के बाद उर्वरक प्रबंधन:-
 

उर्वरक प्रबंधन बीज संचय के बाद हर महीने में दो बार कम से कम उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए अगर किसी महीने के 1 तारीख को आप ने गोबर का प्रयोग 1000 से 1500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर किया है तो फिर 15 तारीख को 25 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सिंगल सुपर फास्फेट और डीएपी का प्रयोग करें | 

उर्वरक के प्रयोग से 2 दिन पहले कम से कम 10 से 15 किलोग्राम कैल्शियम कार्बोनेट जोकि एग्रीकल्चर Limestone  है उसका प्रयोग करेंगे | उर्वरक डालने से 2 दिन पहले चुना यानी Lime  का प्रयोग करना चाहिए उसके बाद हर 12 दिन पर एक बार जैविक खाद और उसके 15 दिन के बाद रासायनिक खाद देना चाहिए जिस महीने में तालाब का पानी ज्यादा हरा हो जाए उस महीने में रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर देना चाहिए |



 मछलियों का रखरखाव और पानी की गुणवत्ता:- 



दोस्तों इस व्यवसाय को सुचारु रुप से चलाने के लिए आपको मजदूरों की भी आवश्यकता पड़ सकती है जो कि इन मछलियों का देखरेख कर सकें और समय-समय पर इन्हें खाना दे सकें इसके साथ ही मछलियों को सुरक्षित रखना भी काफी महत्वपूर्ण होता है वहीं अगर किसी मछली को कोई बीमारी हो जाती है तो ऐसे में आप पोटेशियम परमैंगनेट और साल्ट यानी सोडियम का इस्तेमाल करें क्योंकि एक मछली में फैलने वाले यह कीटाणु या रोग पूरी मछलियों को बीमार कर सकते हैं इसलिए मछलियों की देखरेख का खास ध्यान रखें | 

दोस्तों पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको तालाब को हर हफ्ते में एक बार साफ करना होगा हालांकि आप इस प्रक्रिया को महीने में दो बार भी कर सकते हैं इसके साथ साथ आपको तालाब में भरे पानी का पीएच मान 7 से लेकर 8 तक संतुलित करने की आवश्यकता होगी ऐसा करने से मछलियों को साफ पानी मिलता है और मछलियों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ जाती है |


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